बीजामऊ को पूर्व में विजयगढ़ के नाम से जाना जाता था यहां किले की बुनियाद के अवशेष मिलते हैं उस जगह को खेड़ा मोहल्ला कहा जाता है उस बुनियाद पर ब्रह्मदेव का चबूतरा फर्श चहारदीवारी निर्मित है यहां पर सतीपुर स्थान पर प्राचीन बरगद का पेड़ है व कुआँ निर्मित है जहां कभी लाखा बंजारे व्यापार के उद्देश्य से आते थे वह इस जगह ठहरा करते थे उनके समय के सिक्के बरसात में मिट्टी हटने पर आज भी मिलते हैं यहां के कुछ गणमान्य व्यक्ति जैसे स्वर्गीय लाला हजारीलाल सक्सेना के सुपुत्र माननीय स्व० शिवराज बहादुर आजादी के पश्चात नवाबगंज विधानसभा के प्रथम विधायक रहे. इनके परिजन विदेशों में रहकर बीजामऊ का नाम रोशन कर रहे हैं इस गांव के छात्र-छात्राएं विभिन्न पदों पर सेवारत हैं जैसे श्री अनोखे लाल जी केंद्र सरकार ने लेखा परीक्षक. श्री सौरभ गंगवार इंदौर में सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर सेवारत हैं| यहां पर एक विशेष प्रजाति निवास करती है जो वेशभूषा में हिंदू लगते हैं पर पूर्णतया कबीरपंथी हैं जो अग्नि पूजा मूर्ति पूजा होली दिवाली आदि किसी त्योहार को नहीं मनाते हैं उनका एक गुरुद्वारा है जिसे यह लोग चौकी कहते हैं यहां पर यह भजन करते हैं प्रत्येक पूर्णमासी को सभी लोग एकत्र होकर भजन करने के पश्चात प्रसाद वितरण करते हैं | यह सिलसिला प्रत्येक पूर्णमासी को होता है इनका मुख्य व्यवसाय कृषि व दुग्ध उत्पादन है| यह व्यापार के दृष्टिकोण से दिल्ली. हरियाणा. करनाल. भरतपुर. मुंबई आदि जगह फैले हुए हैं| साध संप्रदाय पूर्णतया शुद्ध शाकाहारी है और यहां पर ब्रितानिया हुकूमत से आज तक शिकार प्रतिबंधित है|